![]() |
फाइल फोटो |
बहराइच विश्व प्रसिद्ध दरगाह हज़रत सैयद सालार मसूद गाजी रह. के आस्ताने पर 1023वां सालाना उर्स-ए-रजब आगामी 1 जनवरी 2026 से आरंभ होगा पाँच दिनों तक चलने वाले इस रूहानी आयोजन में देश-विदेश से आने वाले हजारों जायरीन शामिल होंगे। दरगाह परिसर इन दिनों आस्था, इतिहास और संस्कृक्तियों के अनोखे संगम का केंद्र बन जाएगा।
परचम-कुशाई से होगा रूहानी आगाज
उर्स का शुभारंभ पहली जनवरी को दरगाह शरीफ के ऐतिहासिक नाल दरवाजे पर परचम-कुशाई की रस्म के साथ होगा। परंपरानुसार इसके बाद खुद्दामान की दस्तारबंदी संपन्न कराई जाएगी, जो दरगाह की सदियों पुरानी रूहानी विरासत का प्रतीक है।
4 जनवरी को मनाया जाएगा मुख्य उर्स
उर्स का मुख्य दिन 4 जनवरी 2026 (14 रजब 1447 हिजरी) निर्धारित है। इस दिन सुबह से ही मजार शरीफ पर चादरपोशी, गुलपोशी और जायरीन की भीड़ देखने को मिलेगी। जायरीन गाज़ी मियां की चौखट पर हाज़िरी देकर मन्नतें और दुआएँ करेंगे मुल्क की खुशहाली और अमन के लिए विशेष दुआ मुख्य कार्यक्रम के दौरान दरगाह शरीफ के शाही इमाम मौलाना अरशदुल कादरी मुल्क की तरक्की, अमन ओ-भाईचारे और दुनिया में शांति के लिए विशेष दुआ कराएंगे। दुआ में बड़ी संख्या में जायरीन के शामिल होने की उम्मीद है।
रूहानी कार्यक्रमों से महकेगा वातावरण
पाँच दिवसीय उर्स में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे-महफ़िल-ए-सामा (कव्वाली), रूहानी नात और मनकबत, कुरान ख्वानी, जियारत-ए-आम, लंगर का आयोजन। लंगर में रोजाना हजारों श्रद्धालुओं को भोजन कराया जाएगा। उर्स के दौरान सूफियाना कलाम और कव्वाली से पूरा वातावरण रूहानियत से सराबोर रहेगा। प्रबंधन व प्रशासन की तैयारियाँ पूरी रफ्तार पर उर्स को लेकर प्रबंधन और जिला प्रशासन सुरक्षा, ट्रैफिक, साफ-सफाई, रोशनी, पेयजल और पार्किंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में जुट गया है। भीड़ नियंत्रण और जायरीन के सुगम आवागमन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
उर्स-ए-रजब 2026 दिवसीय कार्यक्रम पाँच
1 जनवरी (11 रजब) परचम कुशाई, खुद्दामान दस्तारबंदी
2 जनवरी (12 रजब)- ऑल इंडिया मुशायरा कार्यक्रम
3 जनवरी (13 रजब)-जियारत-ए-आम, कुरान ख्वानी
पहरहन व लिबास शरीफ की जियारत
4 जनवरी (14 रजब)- सालाना उर्स, खास दुआएँ, लंगर
ब्यूरो रिपोर्ट
मोहम्मद अरमान
मंडल ब्यूरो चीफ देवी पाटन गोंडा
