बढ़ती गर्मी के साथ जहरीले मच्छरो का आतंक शुरू, पारले शुगर व अल्कोहल फैक्ट्री की भूमिका मच्चरो के उत्पादन में सहयोगी

फाइल फोटो : मच्छरो का आतंक


 बहराइच जनपद के विकासखंड फखरपुर व विकासखंड कैसरगंज के बॉर्डर पारले शुगर मिल व अल्कोहल फैक्ट्री के वजह से बढ़ रहा है इलाके में जहरीले मच्चरो का प्रकोप


जनपद के कैसरगंज तहसील अंतर्गत- ग्राम पंचायत परसेंडी, कोठवल कलां, सौगाहना, बेदौरा, रुकनापुर, ऐमा चक सौगाहना व आसपास के तमाम गांवो में एक बार फिर से मच्छरो का तांडव देखने को मिल रहा है,
बढ़ती गर्मी के बदलाव से लगातार मच्छरो की संख्या रोजाना करोडो में बढ़ रहीं है, जिससे आसपास के स्थानीय निवासी का जन जीवन अत्यंत मुश्किलो से गुजर रहा है,  आये दिन कोइ न कोइ जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो रहा है, 

आखिर क्यों है मच्छरो का इलाके में इतना प्रकोप कौन है जिम्मेदार?


प्राप्त जानकारी के अनुमान से अगर बताया जाये तो, इस जहरीले वातावरण को व मच्छरों को पनपमे में इलाके में मौजूद पारले शुगर फैक्ट्री व अल्कोहल केमिकल फैक्ट्री है, जिन्होंने आसपास अत्यधिक मात्रा में वेस्ट पदार्थ जमा किया हुवा है जो जिंदगी का सौदा करने में मुख्य भूमिका निभा रहे है, 

जहरीला धुँवा इतना हानिकारक है की अगर कोइ इंसान नियमित तरीके से स्वास ले तो, बहुत ही घातक बीमारी का मरीज हो जाये व जान से भी हाथ धो दें,,,


जनप्रतिनिधि व सफाई कर्मी भी समय से नहीं करते फॉगिन मशीन द्वारा दवाई छिड़काव, नहीं होती नियमित नालियों की सफाई


ज़ब मीडिया कर्मी व संपादक समी अहमद कबीर ने आसपास के स्थानीय निवासीयों से इस गंभीर विषय पर पूंछताछ की तो जो जवाब निकल कर आया जिससे पत्रकार समी अहमद कबीर हैरान हो गए,

स्थानीय निवासीयों ने बताया की, साल के 365 दिन इलाका फैक्ट्री द्वारा जहरीले धुँवे व हानिकारक वेस्ट पदार्थ के रख रखाव (जमाव) से प्रदूषित रहता है, पारले शुगर फैक्ट्री व अल्कोहल फैक्ट्री रेंज में लगभग 4 किलोमीटर तक प्रदूषण फैलाया जा रहा है जिससे स्थानीय लोगों की जिंदगी नर्क से भी बदतर है, आसपास गांव के पहाड़ापुर के कुछ लोगों ने पलायन भी कर लिया है, और बहुत से निवासी गांव छोड़ने के फिराक में है, जिंदगी रहेगी तो तो ही जिया जायेगा, इस जहरीले वातावरण में मरने से अच्छा है की परिवार के साथ कही दूर जाकर जिंदगी जिया जाये,,,

न तो फॉगिन मशीन से मच्छरो को खत्म करने की दवाई डाली जाती है और न ही नालियों को सफाईकर्मी साफ करते है, जिंदगी बिलकुल दुस्वार है, अब पलायन ही आखिरी रास्ता है,...



जहरीले वातावरण को किसका समर्थन, कौन है जिम्मेदार?



खबर को लिखते हुए आखिर बिंदु पर मेरा सवाल?

कौन है इस जाहरीले वातावरण का जिम्मेदार! आखिर क्यों सरकार को स्थानीय निवासीयों की समस्या पर संज्ञान लेने का समय नहीं है,.. क्या सरकार को यहां के लोगों का दुख नहीं दीखता, आखिर स्थानीय जनप्रतिनिधि व सफाई कर्मी क्यों नहीं करते फॉगिन मशीन से दवाई का छिड़काव,,, 


इन सब सवालों का एक मुद्दा कब प्रसासन के पास पहुंचेगा व कब प्रसासन मामले का निस्तारण करेगा,,,,

लेखक स्थानीय गांव - कोठवल कलां का निवासी है,

ब्यूरो रिपोर्ट-
समी अहमद' कबीर
संपादक - K सन्देश 24

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