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| फाइल फोटो : इमामबाड़ा लखनऊ ब्यूरो रिपोर्ट- समी अहमद कबीर (संपादक) K SANDESH 24 |
बड़ा इमामबाड़ा में AISPLB का राष्ट्रीय अधिवेशन: इमाम अली (अ.स.) के फरमान "जिस दिन लोग अपने अधिकारों की लड़ाई छोड़ देंगे, उस दिन से उन पर अन्याय का दौर शुरू हो जाएगा" की रोशनी में कौम की मांगें और 20 साल का सफर : शाबू ज़ैदी
लखनऊ, 28 दिसंबर 2025: ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के स्थापना के 20 वर्ष पूरे होने पर बड़ा इमामबाड़ा में राष्ट्रीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन की शुरुआत पवित्र कुरान की सूरह फातिहा की तिलावत और सूरह अल-इमरान की आयत नंबर 103 ("अल्लाह की रस्सी को मजबूती से पकड़े रहो और आपस में न बंटो") से हुई।बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सायम मेहदी ने अधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए उपस्थित मौलानाओं, खतीबों, बुद्धिजीवियों और अंजुमन के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने युवाओं को बोर्ड गठन की आवश्यकता बताते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद 1972 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बनाने का प्रस्ताव आया, जिसमें सभी फिरकों को शामिल करने की बात थी। शिया फिरके से मरहूम डॉ. कल्बे सादिक साहब और सुन्नी फिरके से मौलाना तौकीर रजा को नामित किया गया।मौलाना सायम मेहदी ने अपनी याद साझा की कि उस समय वे रायबरेली के महात्मा गांधी कॉलेज में लेक्चरर थे। एक समारोह में मरहूम अली मियां नदवी से मुलाकात हुई, जहां उन्होंने शिया प्रतिनिधित्व की कमी पर ऐतराज जताया। नदवी साहब ने कहा कि डॉ. कल्बे सादिक को शामिल किया गया है, लेकिन बाद में मौलाना तौकीर रजा ने अलग बोर्ड बनाया, जिसमें शियों को सदस्य बनाने पर पाबंदी लगा दी गई।इससे शिया फिरके के मसाइल का हल मुश्किल हो गया। लखनऊ में मौलानाओं, खतीबों और अंजुमनों ने विचार-विमर्श कर अलग शिया पर्सनल लॉ बोर्ड बनाने का फैसला किया। यह प्रस्ताव खतीबे अकबर मरहूम मौलाना मिर्जा मोहम्मद अथर साहब के सामने रखा गया। उनकी अनुमति के बाद बोर्ड का गठन हुआ और उन्हें पहला अध्यक्ष चुना गया। उन्होंने लखनऊ, दिल्ली, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में बोर्ड को मजबूत किया। तीन तलाक जैसे मुद्दों पर फिक्हे जाफरिया के अनुसार मॉडिफाइड निकाहनामा कौम के सामने पेश किया।26 फरवरी 2016 को उनके इंतकाल के बाद उनके छोटे भाई मरहूम मौलाना अशफाक को अध्यक्ष बनाया गया। उनके इंतकाल के बाद मौलाना सायम मेहदी को अध्यक्ष चुना गया। यह अधिवेशन उनकी अध्यक्षता में तीसरा है।बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कौम को संबोधित करते हुए ने जुलबाला का खुतबा नंबर 46 का हवाला देते हुए कहा इमाम अली (अ.स.) ने फरमाया: "जिस दिन लोग अपने अधिकारों की लड़ाई छोड़ देंगे, उस दिन से उन पर अन्याय शुरू हो जाएगा।" इसलिए अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहनी चाहिए और सरकार के सामने मांगें रखनी चाहिए।अधिवेशन के माध्यम से सरकार से निम्नलिखित मांगें की गईं
1,सऊदी हुकूमत पर दबाव बनाकर पैगंबर मोहम्मद (स.अ.व.) की बेटी जनाबे फातिमा ज़हरा (स.अ.) की मزار (जन्नतुल बकी) का पुनर्निर्माण कराया जाए, जो ध्वस्त पड़ी है।
2,देश में बढ़ती मोब लिंचिंग पर सख्त कानून लाया जाए।
सच्चर कमेटी की तर्ज पर एक कमेटी गठित कर हिंदुस्तान में शिया समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का जायजा लिया जाए और उन्हें अलग से आरक्षण दिया जाए, ताकि रोजगार और उत्थान के लिए योजनाएं बनाई जा सकें।
3,UCC पर पुन:र्विचार किया जाए
4,देश के शिया वक्फ बोर्डों, खासकर उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार और कीमती संपत्तियों की अवैध बिक्री की जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और रख रखाव के लिए विशेष कानून बनाया जाए।
5,लखनऊ हुसैनाबाद ट्रस्ट में फैले भ्रष्टाचार और ऐतिहासिक इमारतों की जर्जर स्थिति को तुरंत सुधारा जाए।
6,कौम की बेटियों को शिक्षा के लिए हिजाब पहनने का अधिकार संविधान द्वारा दिया गया है, इसे पूरी तरह लागू किया जाए और इसमें बाधा न डाली जाए।
इस अधिवेशन में बड़ी संख्या में मौलानाओं, खतीबों, बुद्धिजीवियों और अंजुमनों के सदस्यों ने भाग लिया। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद लोग सम्मेलन में देर तक रुके रहे, जो कौम की एकजुटता और उत्साह को दर्शाता है।
