उनकी शख़्सियत बच्चों के तबी इलाज की दुनिया में एक मिसाल मानी जाती है। बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर से लेकर पड़ोसी मुल्क नेपाल तक के वालिदैन अपने बच्चों को लेकर उन्हीं के पास आते हैं और उनके तजुर्बे पर पूरा भरोसा रखते हैं तिवारी साहब की एक ख़ास बात यह है कि वह अपने हर मरीज को पूरी तवज्जो, सलीके और सुकून से जवाब देते हैं। हालांकि हक़ीक़त यह भी है कि जब वह किसी केस को बेहद नाज़ुक बताते हैं, तो ऐसे मरीज बहुत कम ही बच पाते हैं—क्योंकि वह सच्चाई को बिना छुपाए साफ़-साफ़ बयान कर देते हैं। यही वजह है कि लोग उनकी राय को आख़िरी फैसला मानकर चलते हैं। उनका तजुर्बा, उनके हाथ की महारत और बच्चों की नाज़ुक सेहत को समझने का जो फ़न है, वह हर डॉक्टर के बस की बात नहीं होती डॉ. तिवारी साहब ने अपनी तबी जिंदगी में हज़ारों बच्चों का सफल इलाज किया है। कई ऐसे मरीज जिन्हें बड़े अस्पतालों ने उम्मीद से निकाल दिया था, तिवारी साहब ने अपनी लगन और मेहनत से वापस ज़िंदगी की राह पर ला दिया। वह मरीजों से बातचीत में बेहद मुलायम, व्यवहार में विनम्र और इलाज में बेहद पाबंद माने जाते हैं उनकी काबिलियत, इंसानियत और पेशे से वफ़ादारी ने उन्हें लोगों के दिलों में एक खास मुक़ाम दिया है। बहराइच में उनका नाम भरोसे, तजुर्बे और रहमत की तरह लिया जाता है
ब्यूरो रिपोर्ट
मोहम्मद अरमान रजा कादरी
मंडल ब्यूरो चीफ देवी पाटन गोंडा
